हाय, हाय नया जमाना


गतांक से आगे.............
कुछ कम हुआ और वह कुछ बताने के मूड में आये .
खाते -खाते ही बोले,"ई नया जमाना का आवा,बिटियों का मोटा -पतला भी दीखाई दे लाग ."
उनकी बात ने मुझे चक्कर में डाल दिया कि यह मोटे-पतले की बात बीच में कहाँ से आ गयी . आगे की बात सुनकर सारा माजरा समझ आ गया .
वे बता रहे थे " झाक्कन भैया की बिटिया की शादी करवावै गएँ. बारात तो बड़ी तामझाम से आई, पैसे वाली पार्टी थी. सोचा की तगड़ा माल मिलेगा, पर सब बुरा होए मुटापे का सब चौपट हो कर दिन्हेसा '' '' चाचा मोटापे ने तुम्हारा क्या बिगाडा है " '' अरे हमरे जमाना मा तो मोटा आदमी ख़त- पियत घर का समझा जात राहे, पर ई टीबी मा करीना का जीरो फिगर देख कै बिटिया अब जीरो फिगरवा वाला दूल्हा चाहती है." झाक्कन भैया की बिटिया का दूल्हा थोडा खात-पियत रहा.
फेरे हो रहे रहें औ हम पर दछिना की बारिश भी .
अचानक ६वे फेरे के बाद बिटिया पर करीना का दौरा पड गवा.
वा चिल्लाय लागि ,ई दुलहा बहुत मोटा है.हम बियाव न करिबे.
"घर वाले समझाई के हार गये पर वा टस से मस न भई."
ढूलन बोले,"पर चाचा ई सब से तुम्हरी चोटों का का सम्बन्ध?"
"अरे वोई तो, सब बाराती टूट पड़े जनातिन पै . धक्कम-धक्का ,लाठी-जूतन की बौछार होए लागि औ बीच मा फंसे बिचारे चौबे जी ."
''न मिली दछिना , न मिला माल .

लाठी-दंडन का भया कमाल,चौबे जी हो गये हलाल.''
उनकी बात सुनकर ढूलन भाई की हंसी रोके नहीं रूक रही थी, पर चौबे जी के आगे हसना बेकार था . ढूलन भाई ने उनके दुःख को कम करने के लिए रसगुल्ले की प्लेट उनके सामने रख दी . पल भर में ही पूरी प्लेट साफ़ हो गयी . खाने के बाद उनके मुख पर यू तृप्ति झलक रही थी, मनो ज्वार आने के बाद समुद्र शांत हो गया हो .


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