मै खुश हूँ

आज मै खुश हूँ!
क्योकि एक हारा हुआ इन्सान ,
लिखकर सुसाईड नोट
फांसी पर लटक गया .
क्यों न होऊ खुश ?
क्योकि आजाद हो गयी है ,
उसकी पत्नी संध्या ,
जो कल तक थी,
उसकी बंध्या .
पर क्या आजाद है वह ?
शायद नहीं,
अब कोई भी  उससे,
नहीं छीनेगा रूपये,
न बिकेगे घर के बर्तन,
न ही मंहगे कपडे .
अब वह रह सकती है सुखी .
जमा कर सकती है दौलत .
पर क्या वह कर पायेगी ,
उसका स्वयं इस्तेमाल ,
क्या पहन पायगी ,
पसंद के कपडे-लत्ते .
या रह पायगे सुकून से ,
शायद नहीं,
पर क्यों ?
क्योकि भारत में,
इजाजत नहीं है एक स्त्री को,
स्वंत्रता से रहने की .
हर रूप में वह ,
किसी न किसी की बंध्या है,
चारो ओर ही देखो ,
मिलेगी एक संध्या,
पुत्री पर पिता का ,
बहन पर भाई का,
माँ पर बेटे का ,
पत्नी पर  पति  का,
सदा ही नियंत्रण है .
किसी भी  अवस्था में वह,
अकेली नहीं रह सकती,
और अगर रहना भी चाहे तो ,
हमारा सभ्य समाज उसे.
अनगिनत नाम दे देगा .
जैसे स्त्री ने ही लिया है ,
सभी की अस्मिता का ठेका .
खुश हूँ मै भी क्योकि,
इस नियंत्रण मे भी स्त्रीयां,
व्रत रखती है,पूजा करती है ,
अपने मालिको के लिए,
भाईदूज,करवाचौथ ,रक्षाबंधन,तीज
क्या स्त्रीयो के लिए है कोई ऐसा,
पर्व या त्यौहार ,
क्यों ?
है न खुश होने की बात .
 

टिप्पणियाँ

  1. शिखा जी, बहुत बढ़िया वाकई बहुत अच्छा लिखा और फोटो के माध्यम से दिखाया है . में भी पत्रकार हु लेकिन इतनी सजग पत्रकारिता . आप बधाई के पात्र है . ऐसे ही कुछ समाचारों पर गुफ्तगू करने के लिए मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है . www.gooftgu.blogspot.com

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  2. शिखा जी, बहुत बढ़िया वाकई बहुत अच्छा लिखा और फोटो के माध्यम से दिखाया है . में भी पत्रकार हु लेकिन इतनी सजग पत्रकारिता . आप बधाई के पात्र है . ऐसे ही कुछ समाचारों पर गुफ्तगू करने के लिए मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है . www.gooftgu.blogspot.com

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  3. shikha ji,
    aapke bhavon mein dam hai.kya in rishton ke vgair ek stri jee sakati hai. samsya to aapne uthadee. magar hal nahin bataya.hal batati to kavita mein char chand lag jate. fir bhi kavita sarahneey hai ismein koi shak nahin hai . meri shubh kaamnayen. badhaai.

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