कुछ कहना है ,सुकून के लिए


 जिंदगी के चार साल यूं ही निकल गए पता ही नहीं लगा , जिंदगी जैसे ठहर गयी हो. कोई नई सोच नहीं कोई नया काम नहीं। एक ही काम ऐसा था जो मुझे अच्छा लगता था।  मेरी जॉब जो सैलरी से ज्यादा मुझे ख़ुशी देती थी।  मुझे ऐसा लगता था की मेरी भी जिंदगी में कुछ है , कुछ है जहाँ मई खुद हूँ कोई और नहीं।  जो भी है वो मेरी मेहनत से है। दो साल पहले उससे भी हाथ  धोने  पड़े। कारण  तुम्हारे साथ मुझे आना पड़ा। शायद एक अच्छी पत्नी बनने के लिए खुद को भूलना पड़ता है। मेरी जॉब जरूरी नहीं थी क्योकि मेरा काम  तो तुम्हे और तुम्हारी फॅमिली को एंटरटेन करना है । मेरे घरवाले शादी का एप्लीकेशन लेकर तुम्हारे घर गए थे ,जैसा की तुम हमेशा कहते हो , तुम्हारे  घरवाले तो नहीं आये थे। उन्होंने वादा किया था तो मुझे निभाना पड़ेगा ही। । तुम्हारे परिवार और तुम्हारे प्रति मेरी जिम्मेदारिया है , मुझे ये करना चाहिए,  वो करना चाहिए , तुम्हे आप कहना चाहिए और अपनी जॉब की बात न न बिलकुल नहीं क्योकि मेरा सबसे पहला काम तो घर  है,  औरते यही तो करती है फिर तुम कौन सा नया काम कर रही हो  और भी न जाने क्य………………………।
 उफ़  कितनी साडी घरेलू  बातें सुन सुन कर लग रहा  पूरी तर घरेलु टाइप ही हो गयी हूँ , अबी मुझे इन बातो में नहीं पड़ना और फिर से अपनी ख़ुशी तलाशनी है , क्या हुआ अगर दो सालो से घर पर थी , अब एक नयी कोशिश करूंगी  और इस बार केवल अपने लिए सोचूंगी , जब खुद खुस रहूंगी तबी तो दूसरो को भी रख पाउंगी। किसी बहस का कोई आंत नहीं होता। जिम्मेदारी तो होती है पर सबसे पहले अपने प्रति। भगवान ने इतनी खूबसूरत जिंदगी दी है तो ऐसे नकारात्मकता में क्या गुजरना। ……………। मेरे कान अब तुम्हारी फालतू की बातो के लिए बंद है और मुझे अपने लिए आगे की चीजे सोचनी है ,…………… दर गए क्या नहीं यार मै पत्नी की पोस्ट से इस्तीफा नहीं दे रही हूँ मई तो स्वाभिमान और खुसी से जीने की कोशिश  कर रहे हूँ.
तुम भले ही मुझे महत्वकांछी और न जाने कितनी  उपाधिया दो पर आत्सम्मान और अहम
में फर्क होता है. ……………। तुम्हे होगा , और न समझो तो  नहीं अब मेरा इरादा साफ़ है जिंदगी मेरी है , तो कुछ फैसले तो मेरे ही होगे………। वाह इतना सुकून इन सालो के दौरान कभी महसूस नहीं हुअ................ . . बहुत खुश हूँ।

टिप्पणियाँ

  1. दो बार पोस्‍ट किया लेकिन कमेंट अपडेट नहीं हुआ। ++++++ fir try krta huin.......
    तुम्‍हारी पोस्‍ट से लगा कि तुम कहीं परेशान हो। लेकिन तभी ध्‍यान आया कि तुम परेशान हो ही नहीं सकती। तुम तो हमेशा लडने और जीतने वाली हो। लिखती रहो ऐसे ही लगातार लिखती रहो। ताकि भविष्‍य में कभी बुक स्‍टाल से तुम्‍हारी बुक उठाकर मैं अपनों को दिखा सकूं कि देखो ये शिखा है शिखा है शिखा है। वही शिखा जो कभी हार न मानती थी। जो कभ्‍ाी परेशान न होती थी।

    जिम्मेदारी तो होती है पर सबसे पहले अपने प्रति। भगवान ने इतनी खूबसूरत जिंदगी दी है तो ऐसे नकारात्मकता में क्या गुजरना।................. इस नकारात्‍मकता से दूर ही रहना: तुम्‍हे मालूम हे कि जिंदगी को खूबसूरत कैसे बनाना है। ताकि तुम्‍हारा आत्‍मसम्‍मान कभी न डिगे और तुम्‍हे कभी अपने आप पर पछतावा न हो। मजबूत बनो और दूसरों के लिए आदर्श बनो। क्‍यों कि तुम शिखा हो।
    सुमित (sushisumit@gmail.com)

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पीरियड के दौरान एक दिन की पेड लीव..........वॉओ या नो-नो!!!!!

हिमानिका -पहला भाग

प्यार बार बार होता है